भारत में बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग के बीच “ट्रांसफार्मर पर लगे टेललेस यूनिट” (Tailless Unit) को लेकर लोगों में चर्चा तेज हो गई है। गांवों और कस्बों में अक्सर देखा जा रहा है कि हल्का सा अतिरिक्त लोड बढ़ते ही बिजली कट जाती है और कई घंटों तक सप्लाई बाधित रहती है। इससे आम जनता, छोटे व्यापारियों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या होती है टेललेस यूनिट?
बिजली विभाग द्वारा कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर पर एक छोटी सी यूनिट लगा दी जाती हैं जिसमें सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक कट-ऑफ सिस्टम लगा होता है। इसे सामान्य भाषा में “टेललेस यूनिट” कहा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसफार्मर को ओवरलोड और जलने से बचाना होता है।
जब किसी क्षेत्र में बिजली का लोड निर्धारित सीमा से थोड़ा भी ऊपर जाता है, तो यह यूनिट तुरंत सप्लाई बंद कर देती है ताकि ट्रांसफार्मर खराब न हो।
टेललेस यूनिट के फायदे
1. ट्रांसफार्मर को जलने से बचाती है
पहले कई जगह ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर जल जाते थे, जिससे कई दिनों तक बिजली बंद रहती थी। यह यूनिट ट्रांसफार्मर की सुरक्षा करती है।
2. बिजली विभाग का खर्च कम
ट्रांसफार्मर खराब होने पर लाखों रुपये का नुकसान होता है। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम से मरम्मत और बदलाव का खर्च कम हो सकता है।
3. आग लगने का खतरा घटता है
ओवरलोडिंग के दौरान तार गर्म होकर आग पकड़ सकते हैं। यह यूनिट समय रहते सप्लाई रोक देती है।
4. तकनीकी सुरक्षा बढ़ती है
लाइन में फाल्ट या अचानक लोड बढ़ने पर सिस्टम खुद को सुरक्षित कर लेता है।
टेललेस यूनिट की कमियां
1. हल्का लोड बढ़ते ही बिजली बंद
सबसे बड़ी समस्या यह है कि मामूली अतिरिक्त लोड पर भी बिजली कट जाती है। गर्मियों में जब लोग कूलर, एसी और पंखे चलाते हैं, तो सप्लाई बार-बार बाधित होती है।
2. जनता को भारी परेशानी
भीषण गर्मी में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। रात में बिजली कटने से लोगों की नींद खराब होती है।
3. व्यापार प्रभावित
दुकानदारों, वेल्डिंग शॉप, डेयरी और छोटे उद्योगों का काम रुक जाता है।
4. छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
बार-बार बिजली जाने से ऑनलाइन पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर असर पड़ता है।
5. ग्रामीण इलाकों में अधिक संकट
गांवों में पहले से ही सीमित बिजली आपूर्ति होती है। ऐसे में बार-बार कटौती लोगों के गुस्से का कारण बन रही है।
गर्मियों में बढ़ जाती है समस्या
मई-जून की गर्मी में बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। कई मोहल्लों और गांवों में पुराने ट्रांसफार्मर आज की जरूरत के हिसाब से छोटे साबित हो रहे हैं।
जहां पहले 50 घरों के लिए ट्रांसफार्मर लगाया गया था, वहां अब 150 से ज्यादा घर जुड़ चुके हैं। लेकिन क्षमता वही पुरानी है। ऐसे में टेललेस यूनिट बार-बार बिजली बंद कर देती है।
जनता क्या चाहती है?
लोगों का कहना है कि केवल कट-ऑफ सिस्टम लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। यदि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ चुकी है, तो उसी हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होना चाहिए।
समाधान क्या है?
समस्या का असली समाधान यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार और बिजली विभाग को बढ़ते लोड के अनुसार नए ट्रांसफार्मर लगाने चाहिए। जहां जरूरत ज्यादा है वहां भारी क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए जाएं।
इसके अलावा:
- पुराने ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड किया जाए
- हर गांव और मोहल्ले का लोड सर्वे कराया जाए
- गर्मियों से पहले अतिरिक्त बिजली व्यवस्था की जाए
- ओवरलोड वाले क्षेत्रों में अलग-अलग फीडर बनाए जाएं
यदि केवल ऑटो कट-ऑफ सिस्टम लगाया जाएगा लेकिन ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी, तो आम जनता को लगातार बिजली संकट झेलना पड़ेगा।
आज जरूरत केवल ट्रांसफार्मर बचाने की नहीं, बल्कि जनता को राहत देने की भी है।